डकार, पेट की गैस निकालने वाली एक सामान्य विधि है।डकार भोजन के कुछ समय बाद आती है तो हम मानते है कि खाना पच गया। लेकिन हमेशा ऐसा हो जरुरी नहीं। सच बात
तो यह है कि बार-बार समान्य से ज्यादा डकार आना बीमारी
का संकेत है। डाक्टर का कहना है कि समान्य से ज्यादा यानी
सप्ताह में तीन या इससे ज्यादा डकार आतें है तो चिंता की
बात है। भोजन करते समय हम हवा भी निगल लेते है। जब
हम सोडा पीते है, तो उसकी गैस आवाज के साथ लौटती है।
जब ज्यादा डकार आती है तो उसे गैस्टोइसोफेगल रिफ्लक्स
रोग कहते है। इससे सीने में जलन पैदा होती है।
इसका मतलब है कि आपको अपने आहार व
जीवनशैली में बदलाब करना जरुरी है। बदहजमी से भी पेट
फूलना,ऊपरी हिस्से में दर्द, सीने मे जलन जैसे लक्षण नज़र
अएंगे ।
डाइजेशन का संतुलन बिगड़ने पर आती है डकार
डॉक्टर की मानें तो पाचन खराब होने से कब्ज या बदहजमी की प्रॉब्लम हो जाती है। डाइजेशन में मदद करने वाले कुछ बैक्टीरिया पेट में मौजूद होते हैं। इनका संतुलन बिगड़ने पर भी गैस बनती है और डकार आती है। बार-बार डकार आने से एसिड रिफ्लक्स, एसिडिटी और कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
इरिटेबल बाउल सिंड्रोम
इस बीमारी में रोगी को कब्ज, पेट दर्द, मरोड़ व दस्त आदि हो सकते हैं। साथ ही इस रोग का एक बड़ा लक्षण बहुत ज्यादा डकार आना भी होता है। इस समस्या के अलावा पेप्टिक अल्सर के कारण भी ज्यादा डकार आ सकती है।
इरिटेबल बाउल सिंड्रोम
इस बीमारी में रोगी को कब्ज, पेट दर्द, मरोड़ व दस्त आदि हो सकते हैं। साथ ही इस रोग का एक बड़ा लक्षण बहुत ज्यादा डकार आना भी होता है। इस समस्या के अलावा पेप्टिक अल्सर के कारण भी ज्यादा डकार आ सकती है।
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